समकालीन उत्तर भारतीय चित्रकला के विकास में डॉ. रेखा निगम का योगदान: एक आलोचनात्मक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन
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https://doi.org/10.62643/2021.ijerst.v17.n4.4692Abstract
समकालीन भारतीय कला का इतिहास अत्यंत समृद्ध, विविधतापूर्ण और बहुआयामी रहा है। बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध और इक्कीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक दशकों में भारतीय दृश्य कला (Visual Arts) ने अपनी पारंपरिक सीमाओं को तोड़कर एक नई वैश्विक पहचान स्थापित की है। कला के इस संक्रमणकालीन और विकासवादी युग में उत्तर प्रदेश की कलात्मक भूमि का अत्यधिक महत्वपूर्ण योगदान रहा है। विशेष रूप से औद्योगिक नगरी कानपुर और सांस्कृतिक केंद्र लखनऊ ने ऐसे अनेक कला मनीषियों, विचारकों और सर्जकों को जन्म दिया जिन्होंने अपनी कूची और कलात्मक सोच से न केवल प्रांतीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय पटल पर भी आधुनिक कला चेतना को एक नई दिशा प्रदान की। इन्हीं मूर्धन्य हस्ताक्षरों में डॉ. रेखा निगम का नाम अत्यंत आदर और गरिमा के साथ लिया जाता है। डॉ. रेखा निगम केवल एक असाधारण चित्रकार ही नहीं थीं, बल्कि वे एक दूरदर्शी शिक्षाविद्, गंभीर शोधकर्ता और कला की दार्शनिक व्याख्याता भी थीं। उनका पूरा जीवन कला की साधना, उसके अकादमिक सुदृढ़ीकरण और भावी पीढ़ी के मार्गदर्शन में समर्पित रहा। उनका कलात्मक दृष्टिकोण यथार्थवाद की ठोस जमीन पर खड़ा होकर अमूर्तवाद के अनंत आकाश को छूने का प्रयास करता है।
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